लेकिन जरूरत पड़ी तो खौफनाक भी बन जाएंगे
یہ تنہائی شاعری اُن لمحوں کی آواز ہے جب انسان خود سے باتیں کرنے لگتا ہے۔
जो दिल से साफ़ हैं, मगर ज़रूरत पड़ी तो खौफनाक भी बन जाते हैं।
हमारी चाल देखकर ही लोग थर-थर कांपते हैं ,
भाई की पहचान चेहरे से नहीं, औकात से होती है
दामन संभाल कर पकड़, क्योंकि ये खून नहीं, आग है
कल उन्हीं के नाम लिखे होंगे हमारे कदमों ने
हम वो हैं जो खड़े हों तो भीड़ खुद पीछे हटती है।
असली खेल जहाँ है — वहाँ तेरा नाम भी धूल में मिल जाएगा
पर तू website अभी बच्चा है बचा के रख अपनी जवानी..!!
हमारी ख़ामोशी की वजह मेरे मां बाप है लाडले,
और जब मुस्कुराता है तो दुनिया जल जाती है !!
ना खुद कुछ कर पाए, ना हमें झुका पाने की रवानी है।
पर जो नसीब में ना हो उसपर दिल कभी ना आए…!